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तुम्हारी कहानी : ७

Posted On: 14 Sep, 2016 Celebrity Writer,Hindi Sahitya,(1) में

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Tumhari Kahani :7th Chapter

Tumhari Kahani :7th Chapter


तुम्हारी कहानी : ७

[प्रकरण ६ के अन्तमे :जैसेही मैंने ड्राइंगरूममें कदम रखा कांचकी एक प्लेट हवामे तैरती हुई मेरी ओर आई. त्वरा से मैंने अपने आपको झुका लिया और वह उड़न तश्तरी मेरे सरके उपरसे गुज़रती हुई पीछेकी दीवारसे टकराई और चूर हो गई. मैंने ईश्वरका शुक्रिया अदा किया कि बचपनमे मुझे क्रिकेट खेलनेके मौके मिले थे जिसने मुझे तीव्र गतिसे आते हुए बाउंसर को डक करना सिखाया था. बिना हेलमेटके सर बचानेका यह इल्म यहां काम आ गया वर्ना मन्दाकिनीकी उड़न तश्तरी मुझे अवश्य ही अस्पतालमें पहुंचानेमें कामयाब रहती. मैंने अरनोबकी ओर देखा. उसके चहेरे पर शर्म और बेबसीके भाव थे. मैं उसे ज्यादा शर्मिंदा करना नहीं चाहता था ईस लिए मैंने तुरंत नज़र घुमाई और उस उड़न तश्तरीके लॉन्चिंग पेड़ अर्थात मन्दाकिनीकी ओर देखा. वो गुस्सेमे तिलमिलाती कड़ी थी. उसने ब्लू डेनीमकी बहोत ही शॉर्ट पैंट और काली जर्सी पहन रखी थी. मुझे समजते देर नहीं लगी कि यह उसका विद्रोहका लिबास है. क्योंकि उसकी गोरी जंघाएँ आधीसे अधिक उजागर हो रही थी और टाइट जर्सी उसकी पतली कमर और उन्नत उरोजोंके आकार चित्ताकर्षक रूपसे प्रस्तुत कर रही थी. पूरब या पश्चिम, किसी भी सभ्यताके हिसाबसे समाजके उच्च स्थान पर आसीन मेज़बान महोतरमा अपने घर दावतपे आनेवाले किसी ख़ास मेहमानका स्वागत ऐसी वेषभूषामें नहीं करती. और यक़ीनन यह शिष्टाचार मंदाकिनी अच्छी तरह जानती थी. ईस प्रकारके परिधानसे उसने अपने पतिको स्पष्ट रूपसे संदेस दिया था कि मुझे तुम्हारे या तुम्हारे दोस्तकी कोई परवाह नहीं. मैंने भी तय कर लीया कि उसका यह खेल मैं भी बखूबी उसके साथ खेलूंगा. ] आगे पढ़िए …

काली, खुली हुई घुंघराली ज़ुल्फोनके बीच उसका गोरा चहेरा गुस्सेसे तमतमाता नज़र आ रहा था. हम दोनोकी नज़रें मिली तो एक क्षणके लिए वो झेंपी पर तुरन्त ही उसने अपने आप पर काबू पा लिया और पासमें टेबल पर पड़े हुए फूलदानको उठाया और फैंका मेरी ओर. इस बार मैं ऐसे किसी हमलेके लिए सतर्क था. इस लिए बड़ी फुर्तीसे आधा कदम पीछे हटके मैंने वो फूलदान कैच क्र लिया और तुरंत ही उसके पीछे दिवार पर टंगी उसीकी तस्वीर पर दे मारा. मेरा निशाना अचूक रहा. मेरे हाथ से छूटा हुआ फूलदान उसके सरके उपरसे होता हुआ पीछे टंगी उसीकी तस्वीर से टकराया और बड़ी सी खनकके साथ तस्वीर के काँचको तोड़ डाला. तस्वीर भी उस आघातसे खूंटीसे निकल कर फर्श पर पड़ी. उसकी भी बड़ी आवाज़ हुई. और फूलदान भी फर्शसे टकराकर चूरचूर हो गया. क्षणार्धके लिये उसके चहरेपर भय और आश्चर्य छा गए. उसने मुड़कर अपने पीछे देखा. टूटती हुई तस्वीर और बिखरते हुए फूलदान को देख वो थोड़ा सा तिलमिलाई. उसके बाद उसने घूमके वापस मेरी ओर देखा. मैंने मुस्कुराकर उसे कहा,
“यू नीड टु प्रैक्टिस मोर. आपको अधिक अभ्यासकी आवश्यकता है सही निशाना बैठानेके लिए.”
हम दोनोकी नज़रें मिली. वो अपने होठों और आँखोंको मुस्कुराते नहीं रोक पायी. उसका चहेरा अब गुस्सेकी जगह लज्जासे लाल हो गया. वो हथेलियोंके बीच अपना चहेरा छुपाकर सिढीयोंसे उपरके माले पर अपने कमरेकी ओर भागी. थोड़ी देरमे धम्मा दादा और दूसरे एक नौकर गुल्लूने मिलकर फटाफट सब साफ़ कर दिया. अरनॉब एक ओर सोफे पर बैठकर अन्यमनस्क होकर सब देख रहा था. थोड़ी देर मैंने उसे नहीं छेड़ा. फिर मैं उसके पास गया और उसके हाथ पर अपना हाथ रखा. उसने उदास नजरोंसे मेरी ओर देखा और कहा,
“आई एम वैरी सॉरी.”
“तकल्लुफ छोडो.” मैंने उसे कहा, “जाकर अपनी बिवीको मन लो.वास्तवमे वो इस वक्त तुम्हे अपने करीब चाहती है.”
उसने अपना सर हिलाया और उपरके मालेमें अपने कमरेकी ओर गया. टेबल पर रखी एक मैगज़ीन लेकर मैं पढने लगा. धम्मा दादा मेरे लिए फ्रेश ऑरेंज जूस लेकर आये.
करीब आधे घंटे बाद वो निचे आयी. अब वो बेहतर लग रही थी. उसके आते ही पूरा हॉल फ्रेंच परफ्यूम चैनल ५ की खुशबुसे भर गया. बरसोंसे यूरोपकी धनवान महिलाओंका चाहिता रहा है यह परफ्यूम. ऐसा कहा जाता है कि पेरिसमे पचास सालसे अधिक उम्रकी ऐसी कोई महिला नहीं होंगी जिसने अपने जीवनमे कमसेकम एक बार यह परफ्यूम इस्तेमाल नहीं किया हो. एक बार फिर हम दोनोंकी नज़रें मिली. फिर एक बार उसका चेहरा लज्जासे लाल हो गया. वो मेरे सामने वाले सोफे पर बैठ गयी.
“मैं आपका अपमान करना नहीं चाहती थी.” उसने धीमी आवाज़में क्षमा याचना करते हुए मुजसे कहा.
“मैं जानता हूँ.” मैंने मुस्कुराकर उसे जवाब दीया.
“आपको बुरा तो ज़रूर लगा होगा?” शरारत भरी निगाहोंसे देखते हुए उसने मुझे पूछा.
“नहीं. जराभी नहीं.” मैंने थोड़ा गंभीर मुंह बनाते हुए कहा,”मुझे लगा कि मैं किसी विज्ञान कथा आधारीत फिल्मके सेट पर पहुँच गया हूँ.”
“क्यों?” अब उसके चहेरे पर सचमुच आश्चर्य था.
“जीवनमे पहेली बार उड़न तश्तरी जो देखी.” मैंने कहा और वो ठहाका मारकर है पड़ी.
“आपको तो हॉलीवुडमे जॉर्ज लुकास की यूनिटमें बतौर स्पेशल इफ़ेक्ट एक्सपर्ट होना चाहिए.” मैंने अपना मज़ाक आगे बढ़ाते हुए कहा.
वो दोबारा है पड़ी. तभी अरनॉब नीचे आया. मैरून कुरता और सफ़ेद पजामामें वो खूबसूरत लग रहा था. मंदाकिनीको हँसता देख उसके चहेरे पर भी मुस्कान आयी. वो वहां आकर बैठा और मंदाकिनीने उसे मेरे उड़न तश्तरी वाले विचार कहे. वो भी बहोत हँसा. वातावरण एकदम हल्का हो गया. ख़ुशी के इस माहौल को भांप कर धम्मा दादा एक बार फिर सबके लिए फ्रेश ऑरेंज जूस लेकर आये. इस बीच हम लोगोमे बातें चलती रही.
“आप जंगलमे फिल्म शूट करना चाहते हो?” बात बातमें मंदाकिनीने मुझसे पूछा.
“हां. और कुछ ट्राइबल गाँओमे भी.” मैंने कहा.
“किस तरहके लोकेशन आपको चाहिए?” उसने पूछा.
मैंने अपने फिल्मकी कहानीके हिसाबसे आवश्यक लोकेशन्सका वर्णन किया.
“अगर आप मुझे अपनी फिल्मकी कहानी बताओ तो मैं आपको कुछ अच्छे लोकेशन्स के सुझाव दे सकती हूँ.” मंदाकिनीने उत्साहसे कहा.
“ये तो औरभी अच्छी बात है.” मैंने कहा. वाक़ईमें वो जिस तरहसे अब बात कर रही थी उसमे एक दूर दर्शी काबिल महिला अफसरका अंदाज़ था जो मुझे अच्छा लगा.
“लेट अस हेव सम ड्रिंक.” उसने प्रस्ताव रखा.
उसका प्रस्ताव सुनकर अरनॉब थोड़ा झेंप गया.
“धेट्स ग्रेट.” मैंने उसका प्रस्ताव स्वीकार करते हुए कहा.
“लेकिन अरनॉब हमारा साथ नहीं देंगे.” उसने कहा.
‘क्यों?” मैंने पूछा.
“क्योंकि मदहोश करनेवाली हर चीज़से वो परहेज़ करते है. चाहे शराब हो या शबाब.” मंदाकिनीने बड़ी बेबाकीसे कहा और जोरसे हँस दी,
इसबार मैंने हसनेमे उसका साथ नहीं दीया. एक तरहसे उसने अरनोबके पौरुषको ललकारा था. लेकिन मेरी धारणाके विपरीत अरनोबाने बड़ेहि शायराना अंदाजमें जवाब दीया,
“पिलाते पिलाते खून-ए-जिगर साकीको, शराब बेवजह हो गयी;
बात न किजीये शबाबकी…बात न किजीये शाबाबकी,
आतिश-ए-हुसनमे जवानी ख़ाक हो गयी.”

“वाह! क्या बात है. तुम तो बहोत अच्छी शायरी करते हो यार.” उसकी तारीफ़ किये बगैर मेरे से रहा ना गया.
“आज बहोत लंबे समय के बाद उन्होंने शायरी की है. शादी से पहले तो वे रोज़े कमसे काम एक शेर मेरे लिए कहते थे.” मंदाकिनीने कहा. उसकी आवाज़में दर्द छुपा था.
“वक्तके साथ बहोत कुछ बदल जाता है.” अरनोबाने कहा.
मैं खामोश रहा. मन्दाकिनी उठकर ड्रिंककी व्यवस्था करने गयी.
“एक्चुअली अचानक मुझे कल सुबह दिल्ली जाना हुआ है. हमारे डिस्ट्रिक्टके डेवलपमेंटके लिए उसे स्पेशल केटेगरीमें क्लासीफाय करनेके लिए मुख्या मंत्रीश्रीने खुद केंद्र सरकारसे सिफारिश की है. आज शामको ही दिल्लीसे फ़ोन आयाथा कि सम्बंधित मिनिस्ट्रीके सेक्रेटरीसे मिलकर जल्दसे जल्द हमारा केस उन्हें समजाया जाय और उनके गाइडेन्समें ही सारे डाक्यूमेंट्स तैयार किए जाय. ये बहोत अहम् बात है इसलिए मेरा खुदका वहां जाना अति आवश्यक है. चीफ मिनिस्टरके कार्यालयने कल दोपहर बारह बजेका मेरा अपॉइंटमेंट तय किया है. चीफ मिनिस्टरकी कॉन्स्टिट्यून्सी हमारे ही डिस्ट्रिक्टमे है इस लिए उसका महत्व ओर बढ़ जाता है.”
अरनोबकी बात मैं ध्यानसे सुन रहा था.
“ईसलिये सुबह चार बजेकी फ्लाइटसे मुझे दिल्लीके लिए रवाना होना है. रातको ढाई बजे मुझे घरसे ऐरपोर्टके लिए निकलना होगा. मन्नो, आई मीन मंदाकिनी, आज इसीलिए अपसेट हो गई थी. उसने तुम्हारे लिए बड़े उत्साहसे तुम्हारे लिए डिनरका आयोजन किया था और मेरा यूँ जाना हुआ.” अरनॉबने अपनी बात का समापन करना किया.



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